परिचय - ६ - युवा पीढी का विकास


विगत कुछ वर्षों से उनका ध्यान भारत की युवा पीढ़ी की ओर था । उनकी अभिलाषा थी कि उसे ऐसी शिक्षा व ऐसा वातावरण मिले जिसमें भारतीय संस्कृति का सर्वांग समावेश हो । इसकी योजना बनाकर उसमें अपना पर्याप्त समय देते रहे, जिसके लिये इन्हें अरविन्द आश्रम, दिल्ली से बहुत प्रोत्साहन और सहयोग मिला ।

उस उद्देश्य को लेकर उनकी पत्नी की पुण्यस्मृति में देवी सरोजिनी पुण्यार्थ कोष सोसाइटी का निर्माण हुआ है और कई क्रियात्मक योजनायें गतिशील हो गयी हैं ।

उनकी प्रेरणा से पिलानी, ग्वालियर, इन्दौर व भोपाल के अनेक विद्यालयों में चरित्र निर्माण तथा सर्वांगीण विकास की शिक्षा १५+ वर्षों से दी जा रही है ।

सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर तीन भागों में, क्रमशः ६ से ९ वर्ष, १० से १३ वर्ष व १४ से १७ वर्ष तक के विद्यार्थियों के लिये, उनकी लिखी गयी पुस्तकें आज से समाज में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होंगी । हर विद्यालय को इन्हें अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना चाहिये .